आखिर महिलाओ के मुद्दे पर सरकार इतनी असंवेदनशील क्यों

आज के समय में जिस तरह के हालात उत्पन्न  हो रहे है उनसे साफ़ है की सरकार अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रही है  या फिर किसी बड़ी साज़िश का शिकार हो रही है।दूसरी सरकारों मे बलात्कार जैसे जघन्य अपराध  होने पर सारे देश की सड़को पर संघर्ष करते दिहने वाली बीजेपी आज अपने ही विधायक द्वारा बलात्कार के आरोप में बैकफुट पर आ गयी। उत्तर प्रदेश में पिछले 7 दिनों से चल रहे इस हाई वोल्टेज ड्रामे का अंत उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद हुआ। सरकार के बाहुबली विधायक पर पीड़िता एक साल से बलात्कार करने का आरोप लगा रही है लेकिन पुलिस-प्रशासन कुछ नहीं कर पाई । सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले पिता की विधायक के भाई ने पिटाई की जिससे उसकी जेल में मौत हो गयी। रेप पीड़िता मुख्यमंत्री आवास पर आत्महत्या करने जाती है फिर भी मुख्यमंत्री जी का बयान आया की विधायक पर आरोप साबित नहीं हुए जिससे उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकता । बाद में सीबीआई को केस ट्रांसफर कर सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया और उच्च न्यायालय द्वारा गिरफ्तार करने के आदेश के बाद हिरासत में लिया जाता है ।

 

पुलिस के द्वारा आरोपी विधायक को गिरफ्तार करने के लिए उनके गांव में जाने पर समर्थको के विरोध का सामना करना पड़ा । रेप जैसे जघन्य अपराध के आरोपी को बचाना या उसका समर्थन करना कितना सही है। भारत माता की जय बोलने वाले वो लोग आज कहा है जब बहन माताओ पर हो रहे शोषण पर बोलने वाला कोई नहीं है। केंद्र में बैठी सरकार के इस असंवेदनशील हालत से लगता है की वह अपने उस मुद्दे को भूल गयी जिसमे नारा दिया गया था “बहुत हुआ नारियो पर अत्याचार, अबकी बार मोदी सरकार”।

एक पत्रकार सम्मलेन में प्रदेश पुलिस के मुखिया ओमप्रकाश सिंह द्वारा आरोपी को माननीय बोलना कितना सही लगता है। ओपी सिंह वही अधिकारी है जिनके लखनऊ पुलिस अधीक्षक रहते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री के साथ गेस्ट हाउस काण्ड हुआ था।इस केस में जिस प्रकार असआईटी गठित कर योगी जी ने कमान अपने हाथ में लेकर आगे बढे लेकिन गिरफ़्तारी का निर्णय न ले पाना उनकी कमजोरियों को साफ़ दर्शाता है। इस घटना के बाद इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता  की प्रशासन किसी बड़ी शक्ति के हाथो कीकठपुतली बन चूका था।

 

आखिर सरकार की क्या विडम्बना है की अपनी पार्टी के विधायक जिसपर बलात्कार और हत्या का आरोप है उसे बचाने के लिए स्वंय मुख्यमंत्री को आगे आना पद रहा है।एक वर्ष पूर्व महिलाओ पर होने वाले शोषण को मुद्दा बनाकर सत्ता में आने पर क्या योगी जी भी अपना कर्त्तव्य भूलते जा रहे है।

प्रधान सेवक यह बोलकर अपनी छाती फुला रही है की कमल चारो और खिल रहा है लेकिन वो ये बताना भूल रहे की दरअसल यह फूल औरतों, दलितों, अल्पसंख्यकों और मजदूरों के खून से सींचा जा रहा है।आखिर कब तक देश की बहन-बेटिया इन हवस के भेडियो का शिकार होती रहेगी और सरकार इन मुद्दों पर मूक बाधिर होकर देखती रहेगी।

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