कब तक देश सांप्रदायिक भीड़तंत्र की आग में जलता रहेगा

बंगाल के आसनसोल में हुए रामनवमी के जुलूस के दौरान दंगो के घाव अभी भरे भी नहीं थे की बिहार में भी सांप्रदायिक हिंसाओं ने बड़े दंगो का विकराल रूप धारण कर लिया। सभी राजनितिक पार्टिया इन दंगो में अपनी चुनावी रोटियां सेक रही है। आसनसोल में जब हिंसा के दौरान 4 लोगो की हत्या कर दी जाती है और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली में तीसरे मोर्चे के लिए विपक्ष को इकठ्ठा कर रहे है। चलिए कोई बात नहीं वहां तो तृणमूल कांग्रेस की सरकार है लेकिन बिहार में दंगे न रोक पाना किसकी विफलता है कांग्रेस की जो की महज 27  विधायकों के राज्य में चौथे नंबर की पार्टी है या जनता दल की जिसका साथ छोड़कर सुशासन बाबू के नाम से मशहूर नितीश कुमार बीजेपी के साथ चले गए।

दोनों ही दंगे रामनवमी के जुलूस के दौरान हुए क्या युवाओ का हाथ में तलवार लेकर चलना प्रशासन को नहीं दिखता या सत्ता वालो ने उनकी आँखों पर पट्टी बांध कर खड़ा कर दिया है। जिन हाथो में किताब कलम होने चाहिए उनसे गोलिया चलवाई जा रही है 4 साल पहले युवाओ को जो सपना दिखाकर बीजेपी सत्ता में आयी थी अपने उन वादों से बहुत दूर खड़ी है। पकोड़े तलने को रोजगार की श्रेणी में लेकर पहले ही प्रधानमंत्री जी अपनी किरकिरी करा चुके है।

क्या सिर्फ चुनावी महत्वकांशाओ के लिए युवाओ का इस्तेमाल किया जायेगा या जिस उम्मीद के साथ वो इन पार्टियों को वोट देकर सत्ता में लाते है उनकी आखिर कब इन युवाओ को इस देश की मुख्या धारा से जोड़ा जायेगा। इन लोगो की गोली जिस माँ की कोख सूनी कर जाती है कभी वह जाकर महसूस किया की गोली लगने वाला हिन्दू था या मुसलमान क्या इन बच्चो की हत्याओं से धर्म पर आने वाला खतरा टल जायेगा ।

ये बात किसीसे छुपी नहीं की  2014 में सरकार सिर्फ इन्ही सांप्रदायिक दंगो के बल पर आयी थी जनता  को विश्वास दिलाया गया था की भविष्य में इस प्रकार की घटनाये नहीं होगी लेकिन आंकड़ों के अनुसार इस तरह की घटनाये 4  गुना बढ़ी है।

बिहार में दंगो पर अभी बिहार सरकार की और से कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है वही केंद्र में बैठी बीजेपी की और से भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया आरोप प्रत्यारोप के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज ने कांग्रेस पर देश को बाटने का आरोप लगाया लेकिन वो ये भूल गए की बिहार में उन्ही की पार्टी के सहयोग से सरकार चल रही है।

मोदी जी ने भारत को युवाओ का देश बताया था लेकिन उन नौजवानो के लिए क्या कदम उठाये गए ये कभी नहीं बताया हर साल 2 करोड़ नौकरी देने के जिस वादे को मोदी जी जनता के साथ किया था उससे भी वो सैकड़ो मील दूर है हर व्यक्ति को इसके हुनर के हिसाब से काम देने का वायदा किया था क्या इन सब युवाओ में मोदीजी को दंगाई और हिंसक लोग दिखते थे।कश्मीर में पत्थरबाजों के साथ जो सलूक किया जाता रहा है क्या वही इस भीड़ के साथ नहीं करना चाहिए

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here