तो गुजरात में भाजपा ताज खोने के कगार पर?

राहुल गांधी के कांग्रेस के अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावनाओं के बीच कांग्रेस के लिए गुजरात से अच्छी खबर आ रही है. और ठीक इसके विपरीत भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के लिए चिंतित करने वाली खबर.

गुजरात में पहले फेज के चुनाव से ठीक पांच दिन पहले एक हिन्दी न्यूज चैनल के ओपिनियन पोल में यह बात निकल कर आई है कि 22 साल से गुजरात में राज कर रही बीजेपी को कांग्रेस कांटे की टक्कर दे रही है. दोनों ही पार्टियां 43-43 फीसदी वोट के साथ आमने सामने हैं. और जहाँ तक सीटें जीतने का सवाल है तो ओपिनियन पोल के अनुसार 182 सदस्यों वाले गुजरात विधानसभा में बीजेपी को कुल 91 से 99 सीटें मिलने की उम्मीद है जबकि कांग्रेस की झोली में 78 से 86 सीटें आती नज़र आ रही हैं. इस ओपिनियन पोल के अनुसार GST और नोटबंदी से गुजरात के व्यापारी काफी नाराज हैं और अधिकांश व्यापारी कांग्रेस के साथ चले गए हैं. ये बातें एबीपी न्यूज, लोकनीति और सीएसडीएस द्वारा किए गए ओपिनियन पोल में साफ तौर पर सामने आई हैं.

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गुजरात के हर-एक क्षेत्र में भाजपा को कड़ी चुनौती….

ओपिनियन पोल के अनुसार गुजरात के चारों क्षेत्रों में कांग्रेस भाजपा को टक्कर देती नज़र आ रही है. मध्य गुजरात जिसमे विधानसभा की 40 सीटें है वहां गांवों में कांग्रेस को बढ़त मिलती दिख रही है. यहाँ भाजपा और कांग्रेस के बीच मात्र 1 फीसदी वोट का अंतर दिख रहा है.

दक्षिण गुजरात में विधानसभा की कुल 35 सीटें है जहाँ कांग्रेस को 42 फीसदी वोट मिलते दिख रहे हैं तो भाजपा को 44 फीसदी वोट मिल रहे हैं. उत्तर गुजरात में विधानसभा की 53 सीटें हैं. ओपिनियन पोल के मुताबिक यहाँ कांग्रेस को 49 फीसदी वोट मिलने की संभावना है जबकि भाजपा को सिर्फ 45 फीसदी वोट ही मिल सकते हैं.

गुजरात के सौराष्ट्र – कच्छ क्षेत्र में विधानसभा की 54 सीटें हैं. यहाँ भाजपा की स्थिति थोड़ी ठीक है. यहाँ भाजपा को 46 फीसदी वोट मिलने की संभावना दिख रही है जबकि कांग्रेस को सिर्फ 30 फीसदी वोट मिलते दिख रहे हैं.

लगातार भाजपा का गिरता ग्राफ:

हालांकि, इस ओपिनियन पोल के मुताबिक भाजपा ही सरकार बनाएगी लेकिन अगर सीटों का ये अंतर और घटा तो कांग्रेस गुजरात में वापसी कर सकती है. और इसकी उम्मीद ज़्यादा दिख रही है. क्योंकि जैसे-जैसे चुनावों की तरीख नज़दीक आती जा रही है, कांग्रेस की स्थिति और भी मज़बूत होते जा रही है.

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यहीं एजेंसी ने जब पिछले महीने यानि नवंबर में ओपिनियन पोल किया था उसमे भाजपा को 113 से 121 सीटें तक मिल रही थीं तथा कांग्रेस को मात्र 58 से 64 सीटें. यानि एक महीने के अंदर भाजपा को करीब 22 सीटों का नुकसान और कांग्रेस को 20 सीटों का फायदा. और इसी एजेंसी ने जब अगस्त यानि तीन महीने पहले ओपिनियन पोल निकाला था तो भाजपा को 144 से 152 सीटें दे रही थी और कांग्रेस को सिर्फ और सिर्फ 26 से 32 सीटें. यानि मात्र तीन महीने में ही भाजपा को 53 सीटों का नुकसान और कांग्रेस को 52 सीटों का फायदा हुआ है.

अंतर साफ़ दिख रहा है. जैसे-जैसे चुनावों की तारीख नज़दीक आ रही है भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं. वो भी तब जब भाजपा के लिए यह चुनाव नाक की लड़ाई है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह गुजरात से ही आते हैं और अगर भाजपा यह चुनाव हारती है तो इसका असर अगले लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिलेगा. वहीं कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए यह किसी संजीवनी से कम से नहीं होगा.

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