संसद स्थगित है तो क्या, धर्म संसद तो है

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हिंदी में विडंबना और अंगरेज़ी में ‘आयरनी’ इसी को कहते हैं. संसद का शीतकालीन सत्र टाल दिया गया है और धर्म संसद की ‘कार्यवाही’ ज़ोरदार तरीक़े से चली है.

धर्म संसद अपने आप में इनोवेशन है, धर्म में सवाल नहीं पूछे जाते, संसद में पूछे जाते हैं, ऐसी संसद बना ली जाए जहाँ कोई सवाल न पूछे, ये इनोवेशन नहीं तो और क्या है?

संसद क़ानून बनाने के लिए है, मुद्दों पर चर्चा करने के लिए है, लेकिन अगर राष्ट्रहित में काम करने वाली सरकार हो, प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी के सभी लोग देशभक्त हों, सभी धर्म के अनुरूप आचरण करते हों तो संसद को ब्रेक दिया ही जा सकता है.

2014 के मई महीने में जिस ‘लोकतंत्र के मंदिर’ की सीढ़ियों पर शीश नवाकर देश के नव-निर्वाचित प्रधानमंत्री रो पड़े थे फ़िलहाल उसके पट बंद हैं क्योंकि वहाँ कुछ लोग राफ़ेल सौदे, पैराडाइज़ पेपर्स और जय शाह के विकास के नए मॉडल जैसे अधार्मिक प्रसंग उठाने को बेताब हैं.

सुप्रीम कोर्ट से सवाल

पूरी सरकार दिसंबर महीने के मध्य तक गुजरात का गौरव बढ़ाने-बचाने में लगी है, तीसेक मंत्री गुजरात में हैं, कोई बात नहीं, देश तो अफ़सर चला लेंगे, विपक्ष को भी एक-डेढ़ महीने धीरज रखना चाहिए, जवाब लेकर क्या करेंगे. गुजरात में जीत गए तो वही जनता का जवाब होगा, अगर संयोगवश हार गए तो वही लोकतंत्र की जीत होगी.

परंपरा रही है कि नवंबर के दूसरे-तीसरे हफ़्ते तक शीतकालीन सत्र की शुरूआत हो जाती है, लेकिन परंपराओं का पालन करते रहे तो ‘न्यू इंडिया’ कैसे बन सकता है?

धर्मराज यानी सु्प्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस से नेशनल लॉ डे के मौक़े पर 26 नवंबर कानून मंत्री ने पूछा है कि प्रधानमंत्री पर पूरे देश को विश्वास है, आपको क्यों नहीं है? वित्त मंत्री ने कहा है कि सबको अपने काम से काम रखना चाहिए, बात ठीक भी है.

साधु-संत और ब्रह्मचारी अपने काम से काम रखते हैं, बच्चे पैदा करना जनता का काम है, साधुओं का नहीं, उन्होंने धर्म संसद में जनता को बताया कि तुम चार बच्चे पैदा करो, वे ख़ुद ऐसा कुछ नहीं करते, केवल आशीर्वाद देते हैं जैसे राम-रहीम या आसाराम बापू देते थे.

उडुपि के धर्म संसद से एक और सुझाव आया है कि हिंदू मोबाइल फ़ोन फेंककर अपने हाथों में शस्त्र धारण करें, इस पर प्रधानमंत्री के गृहराज्य के बंधु क्या सोचते हैं, जो करोड़ों हाथों में मोबाइल थमा चुके हैं. धर्म संसद के इस प्रस्ताव पर उनकी राय पूछनी चाहिए, वैसे वे धर्म और धर्माचार्यों का सम्मान करने वाले व्यक्ति माने जाते हैं.

मोबाइल फ़ोन को हथियार तरह की इस्तेमाल करने वाले आइटी सेल के लोगों की राय भी इस मामले में पूछी जानी चाहिए. रहीम को एपीजे अब्दुल कलाम की तरह अच्छा मुसलमान समझकर याद करना चाहिए, ‘जहाँ काम आवे मोबाइल, कहाँ करे तलवार.’

ये छोटे-मोटे मतभेद हैं जो ‘परिवार’ के भीतर होते रहते हैं, सुलझा लिए जाएँगे. परिवार काफ़ी बड़ा है और ढेर सारे काम कर रहा है. जहाँ विश्व हिंदू परिषद ने धर्म संसद का आयोजन किया है, वहीं परिवार के दूसरे सदस्य बजरंग दल ने लाखों युवाओं को धर्म के कार्य के लिए नियुक्त करने की घोषणा की है.

इससे बेरोज़गारी की कांग्रेस जनित समस्या से राहत तो मिलेगी ही, साथ ही राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जाने का लक्ष्य प्राप्त करने में भी सहायता मिलेगी, करोड़ों लोगों को रोज़गार देने के पीएम के वादे को पूरा करने की दिशा में भी प्रगति होगी.

सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ग़रीबी, भुखमरी, किसानों की आत्महत्या और अस्पतालों में बच्चों की मौत की बात करने वाले लोग समझ पाएँगे कि देश की प्राथमिकताएँ क्या हैं?

कर्नाटक में चुनाव होने वाले हैं, गुजरात में हो ही रहे हैं, ऐसे में धर्म संसद का आयोजन कहीं इसी ख़याल से तो नहीं किया गया, ऐसे सवाल यज्ञों में विघ्न डालने का काम करते ही रहते हैं, उनके आरोपों का खंडन कर दिया गया है.

धर्म संसद में ये भी कहा गया है कि अगर विधर्मी युवाओं ने प्रेमयुद्ध बंद नहीं किया तो बजरंग दल के युवाओं को विधर्मी मोहल्लों में उनकी युवतियों को आकर्षित करने के लिए भेजा जाएगा, विधर्मी युवतियों को दैवयोग से बजरंग दल के युवा आकर्षक लगने लगेंगे, ऐसा माना जाना चाहिए.

राम मंदिर निर्माण

ये प्रेमयुद्ध के प्रतिशोध के लिए बनाई गई रणनीति है लेकिन इससे तो प्रेम का ही प्रसार होगा, यही सनातन सौंदर्य है.

धर्म संसद में गोरक्षा में जुटे लोगों के प्रति ‘अत्याचार’ होने, क़ानूनों का ‘दुरुपयोग’ होने की आशंका पर भी चर्चा हुई और सुप्रीम कोर्ट को एक प्रस्ताव भेजा जा रहा है जिसमें कहा गया है कि गोरक्षकों पर नहीं, गोहत्या करने वालों पर शिकंजा कसा जाए.

गोरक्षा करने वालों ने अब तक बीसेक लोगों की ही जान ली होगी लेकिन पता नहीं कितनी गायें मार डाली गई होंगी, तर्कसंगत बात है बिल्कुल.

सबसे महत्वपूर्ण बात है कि धर्म संसद में परिवार के मुखिया ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर ही बनेगा, वहाँ कुछ और नहीं बन सकता.

धर्म संसद

राम मंदिर बनाना कुटीर, लघु या मध्यम उद्योग नहीं है, लेकिन इसी विभाग के राज्य मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि मंदिर निर्माण में सभी को सहयोग देना चाहिए क्योंकि सभी राम के वशंज हैं, यहाँ बाबर का कोई वंशज नहीं है. मतलब जो इस काम में नहीं जुटेंगे वे बाबर के वशंज माने जाएँगे.

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त सचिव सुरेंद्र कुमार जैन ने दो अहम घोषणाएँ की हैं, 18 अक्तूबर 2018 से विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा और अगली धर्म संसद अयोध्या में होगी.

इस पर सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई होनी है, इस मामले में धर्म संसद का मत स्पष्ट है कि सबसे ऊँचा न्यायालय हमारे प्रभु का है.

संसद और सुप्रीम कोर्ट जब बताना चाहें तब बताएँगे कि धर्म संसद के आदेश का वे पालन करेंगे या कुछ दूसरे विकल्प भी हैं.

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