यूपी की राजनीति में बसपा का फिर से उभरना मायावती के लिए शुभ संकेत

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश नगरीय निकाय चुनाव की मतगणना के शुरूआती रूझान में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अन्य दलों से बढ़त लेती दिख रही है। प्रदेश की 16 नगर निगम में भाजपा प्रत्याशी महत्वपूर्ण बढ़त बनाये हुये है। इस चुनाव में पहली बार किस्मत आजमा रही बसपा अप्रत्याशित जीत की ओर बढ़ती दिख रही है।

बसपा 16 में से 4 नगर निगमों आगरा व झांसी, अलीगढ़ मेरठ में आगे है, जबकि आठ में नंबर दो पर है। पहली बार सिंबल पर यह चुनाव लड़ रही बीएसपी सत्ताधारी बीजेपी को कड़ी टक्कर दे रही है। जबकि मेयर का चुनाव शहरी क्षेत्र में होता है, जहां पारंपरिक तौर पर बीजेपी की पकड़ मजबूत मानी जाती है।

यह चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहली अग्निपरीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। निसंदेह बीजेपी के सबसे ज्यादा प्रत्याशी जीत की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन बसपा ओवरऑल नंबर दो की पोजिशन बनाए हुए है।

वरिष्ठ पत्रकार सुभाष निगम कहते हैं कि ‘बीएसपी को नकारा नहीं जा सकता, इस चुनाव के रुझान यही बता रहे हैं। मायावती साबित कर रही हैं कि वह प्रदेश में एक विकल्प हैं। अगर इस चुनाव में बीएसपी अच्छा प्रदर्शन करती है तो उसका खोया रसूख वापस मिलना शुरू हो जाएगा।’

पार्टी 2012 से विभिन्न चुनावों में लगातार हार और जनाधार में गिरावट झेल रही है। 2012 में बसपा को सपा ने विधानसभा चुनाव में हराया था। इसके बाद 2014 में लोकसभा चुनाव में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। वहीं 2017 विधानसभा चुनाव में पार्टी 403 में महज 19 सीट ही हासिल कर सकी। ऐसे में शहरी क्षेत्र वाले चुनाव में उसकी बढ़ती पकड़ मायावती के लिए अच्छा संकेत हो सकती है।

निगम कहते हैं कि ‘सपा खुद बिखरी हुई है इसलिए उनकी जगह बसपा ले रही है।’ बसपा नेता सुधींद्र भदौरिया का कहना है कि ‘पार्टी ने हमेशा लोगों के हितों की लड़ाई लड़ी है। इसलिए लोग बसपा के साथ हैं। अभी परिणाम की प्रतीक्षा करनी चाहिए।’

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